Anashakti Yog (PB)

Anashakti Yog (PB)

Rs. 70/-

  • Writer: M.K. Gandhi
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  • Availability: In Stock
  • ISBN:81-7309-008-4
  • Pages:176
  • Edition:Fifth
  • Language:Hindi
  • Year:2008
  • Binding:Paper Back

 

महात्मा गांधी के जीवन पर गीता का गहरा प्रभाव पड़ा था। उससे उन्होंने ज्ञान और भक्ति की प्रेरणा पाई; लेकिन उससे भी अधिक उन्हें निष्काम कर्म की महिमा का पता चला। अपने जीवन में वह बार-बर इस बात पर जोर देते रहे कि कर्म करो, पर उसके फल की इच्छा रखकर नहीं। वे लिखते हैं, ‘‘परिणाम की चिंता करनेवाले की स्थिति विषयांध की-सी हो जाती है और अंत में वह विषयी की भांति सारासार की, नीति-अनीति का विवेक छोड़ देता है और फल प्राप्त करने के लिए हर किसी साधन से काम लेता है और उसे धर्म मानता है।’’ प्रस्तुत पुस्तक में मूल श्लोकों के साथ वहीं अनुवाद दिया गया है। विषय की स्पष्टता तथा पाठकों की सुविधा के लिए यत्र-तत्र गांधीजी ने अपनी टिपपणी भी दी है।

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