Kahte-Kahte Bat Ko (PB)

Kahte-Kahte Bat Ko (PB)

Rs. 110/-

  • ISBN:978-81-7309-7
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ज्योत्स्ना मिलन उन लेखिकाओं में हैं जो जीवन जगत् और जीवन-समीक्षा दोनों पर पकड़ बनाए रख सकती हैं। उनका संवेदना तंत्र नए युग की प्रश्नाकुलताओं-चिंताओं का संकल्पपूर्वक वरण करता है। इस वरण में गीता का कर्म-दर्शन रिला-मिला रहता है और जीवन के दायित्वों के निर्वाह की चेष्टा। परंपराओं के प्रति उनमें एक तरह की सजगता है और आधुनिक भाव-बोध के प्रति सजगता। जीवन की जटिलताओं को उनका मानस ज्ञानबोध के स्तर पर झेलता है, लेकिन उनके भार से वे अपने को दबा हुआ नहीं पातीं। उनमें सर्जनात्मकता का विस्फोट बारह वर्ष की उम्र से हुआ और काव्य-सृजन ने उनकी कल्पना को नई अंतर्वस्तु दी। इसलिए आज लगभग साठ वर्ष से अधिक समय से ज्योत्स्ना मिलन का सृजन-कर्म निरंतर चल रहा है। इस सक्रियता के कारण उनका लेखन समाज और संस्कृति को समझने का तर्क है और वह विचार भी जो लीक तोड़कर सृजन-पथ पर बढ़ता रहा है।

ज्योत्स्ना मिलन की सृजन-प्रेरणा दूसरों तक अपनी बात संप्रेषित करने की है ही। यह भी है कि 'अप्प दीपो भव' के आत्म-प्रकाश में 'अन्य' की जड़ता को कैसे काटा जाए। शब्द से खेलते हुए शब्द के सत्य से साक्षात्कार यही रचनाकार की मुक्ति है।

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